करवा चौथ 2025 – तिथि, महत्त्व, व्रत कथा और पूजन विधि
भारत में पर्व और त्यौहार केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। इन्हीं विशेष पर्वों में से एक है करवा चौथ। यह दिन विवाहित स्त्रियों के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। करवा चौथ का त्योहार भारत में विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है।
करवा चौथ 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तारीख – 10 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)
- करवा चौथ व्रत की तिथि प्रारंभ – 10 अक्टूबर सुबह 06:20 बजे
- तिथि समाप्त – 11 अक्टूबर सुबह 04:10 बजे पूरा
- व्रत पूरा होने का समय – चंद्रोदय के बाद
- चंद्रोदय समय – रात्रि 08:25 बजे (शहर अनुसार समय भिन्न हो सकता है)
करवा चौथ का महत्व
- करवा चौथ केवल पति की लंबी आयु के लिए नहीं बल्कि दाम्पत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
- यह व्रत स्त्रियों की आस्था, शक्ति और त्याग का परिचायक है।
- इस दिन महिलाएँ न केवल पति की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं बल्कि परिवार की खुशहाली के लिए भी भगवान से आशीर्वाद मांगती हैं।
- करवा चौथ से पारिवारिक रिश्तों में अपनापन और मजबूती आती है।
करवा चौथ व्रत कथा
करवा चौथ की कथा सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद प्रेरणादायी है।
प्राचीन काल में एक साहुकार की सात बेटियाँ और एक बेटा था। करवा चौथ के दिन सातों बहनों ने व्रत रखा। सबसे छोटी बहन भी व्रत पर थी, परंतु उसका भाई उसे भूखा देख नहीं सका। उसने छल से बहन को जल्दी चाँद निकलने का भ्रम दिखाया और बहन ने व्रत तोड़ दिया। परिणामस्वरूप उसके पति की मृत्यु हो गई। बाद में देवी पार्वती की कृपा से और बार-बार व्रत करने से उसके पति को जीवनदान मिला।
यह कथा हमें सिखाती है कि व्रत में श्रद्धा और नियम का पालन करना जरूरी है।
करवा चौथ की पूजा विधि
- सुबह सूर्योदय से पहले सर्गिका सेवन किया जाता है। इसमें फल, मिठाई और सूखे मेवे शामिल होते हैं।
- महिलाएँ पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
- शाम को करवा चौथ की पूजा की जाती है। थाली में करवा (मिट्टी का कलश), दीपक, मिठाई, सिंदूर, चूड़ियाँ और श्रृंगार सामग्री रखी जाती है।
- महिलाएँ समूह में या घर पर करवा चौथ की कथा सुनती हैं।
- रात्रि को चाँद निकलने पर छलनी से चाँद और फिर पति का मुख देखकर अर्घ्य दिया जाता है।
- इसके बाद पति के हाथों से जल या भोजन ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ और आधुनिक समय
- आज के समय में यह पर्व केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया। कई जगह पुरुष भी अपनी पत्नी की लंबी आयु और रिश्ते की मजबूती के लिए उपवास रखते हैं।
- सोशल मीडिया और ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में करवा चौथ पर गिफ्ट, साड़ी, मेहंदी, ज्वेलरी और कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री में तेजी आती है।
- यह त्यौहार फैशन और परंपरा का संगम बन चुका है। महिलाएँ नए-नए आउटफिट्स और मेकअप ट्रेंड्स अपनाती हैं।
करवा चौथ से जुड़ी रोचक बातें
- “करवा” का अर्थ है मिट्टी का बर्तन और “चौथ” का मतलब चौथी तिथि।
- यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है।
- करवा चौथ न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीय परिवारों में भी धूमधाम से मनाया जाता है।
- इस दिन मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है क्योंकि मेहंदी पति-पत्नी के प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है।
करवा चौथ के फायदे (आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से)
- पति-पत्नी के बीच विश्वास और प्रेम गहरा होता है।
- परिवार में सामूहिकता और उत्साह बढ़ता है।
- महिलाएँ आत्मसंयम और धैर्य का अनुभव करती हैं।
- यह व्रत भारतीय संस्कृति और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है।
निष्कर्ष
करवा चौथ का पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई और मजबूती का प्रतीक भी है। यह दिन हमें त्याग, प्रेम और विश्वास का संदेश देता है। चाहे समय कितना भी बदल जाए, करवा चौथ की महत्ता हमेशा बनी रहेगी।